

श्रीकृष्ण पाथेय न्यास, भोपाल
14 विद्याएँ, 64 कलाएँ और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित निःशुल्क प्रतियोगिता।
प्रतियोगिता समाप्त हो गई है
परिणाम कुछ दिनों में इसी वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएँगे।
भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व केवल उनकी लीलाओं और पराक्रम से नहीं, बल्कि महर्षि सांदीपनि के आश्रम में प्राप्त शिक्षा, संस्कार और अनुशासन से पूर्ण हुआ। वहीं उन्होंने 14 विद्याओं, 64 कलाओं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विवेक, सेवा, धैर्य, कर्तव्य, राष्ट्र-भक्ति और नेतृत्व का पाठ सीखा। यही गुरु–शिष्य परंपरा उनके जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बनी और आगे चलकर उन्हें जगद्गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया।
माननीय मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
अध्यक्ष