मध्यप्रदेश शासनश्रीकृष्ण पाथेय न्यासश्रीकृष्ण पाथेय न्याससंस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन
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देशभाषा विज्ञान

क्षेत्रीय बोलियों का ज्ञान

देश भाषा, लोक भाषा या जातीय भाषाओं का ज्ञान होना और उनका अभ्यास करना भी एक कला है। प्राचीन भारत में मागधी, आवन्ति, प्राच्या, सौरसैनी, अर्धमागधी, बाह्लीका और दक्षिणात्या मुख्य भाषायें थीं। इसके साथ ही शाकरी, आभीरी, चाण्डाली, षाषरी, द्रावणी, आंध्रि आदि विभाषायें भी प्रचलित थीं।

अप्रकाश्यवस्तुज्ञापनार्थं तद्देशीयैर्व्यवहारार्थम् ।

राजकुमार–राजकुमारियाँ, गणिकाएँ, अभिनेता इन भाषाओं की विधिवत् शिक्षा प्राप्त करते थे। श्रीकृष्ण की 8 प्रमुख पत्नियाँ रुक्मिणि, सत्यभामा, जाम्बवति, कालिंदी, मित्रवृंदा, नागनजिती अलग–अलग जनपदों से सम्बद्ध थीं। उन सब जनपदों की भाषायें अलग–अलग थीं। श्रीकृष्ण ने उन सबके साथ अनेक वर्ष तक गृहस्थ जीवन सुखपूर्वक बिताया। इससे भी स्पष्ट है कि श्रीकृष्ण इन विभिन्न जनपदों की भाषा–विभाषाओं में पूर्ण निपुण थे।