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निरुक्त

शब्द व्युत्पत्ति

वेद के भाष्यकार आचार्य सायण कहते हैं कि-

अर्थावबोधो निरपेक्षत्या, पदजातम् यत्रोक्तं तत् निरुक्तं।

अर्थात्- अर्थ ज्ञान में निरपेक्षता से पदों की व्युपत्ति कही जाती है, वह निरुक्त है। निरुक्त वेद विज्ञान के आन्तरिक स्वरूप को उद्घाटित करता है। निरुक्त शब्द का अर्थ है- व्युत्पत्ति। प्रत्येक शब्द किसी न किसी धातु के साथ संबद्ध रहता है। निरुक्त के अनुसार सभी शब्द किसी न किसी धातु से निर्मित हैं। आचार्य शाकटायन का मत है कि सभी शब्द धातु से उत्पन्न होते हैं। आजकल इसी का नाम भाषा विज्ञान है। अपने देश में कम से कम आज से तीन हजार वर्ष पूर्व इस शास्त्र का यह सिद्धान्त निरुपित हुआ था।