कुन्दकर्माण्यपद्रव्यार्थानि ।तक्षकर्म नक्काशी का शिल्प है। तक्षकर्म के आधार हैं– काष्ठ, पत्थर, सोना–चाँदी आदि धातुएँ, हाथी दाँत, शंख, श्रृंग, चर्म आदि। इन आधारों पर अलंकरण हेतु पत्र लता, हंस, मकर, गज, हिरण, मयूर, मत्स्य, सिंह, व्याल, कुत्तरिका, शालभंजिका, गंधर्व–अप्सरा एवं नाना प्रकार के जाल निव्यूह शैली में उकेरे जाते थे अथवा कुहरशैली में भीतर की ओर खोद कर स्वर्ण या हाथी दाँत से भर दिये जाते थे। इस शिल्प को तक्षकर्म कहा जाता था। इसका योग तक्षणकला के साथ है।

